एस के श्रीवास्तव विकास

वाराणसी/-विकास परियोजनाओं के नाम पर किसानों की कीमती और उपजाऊ कृषि भूमि के अधिग्रहण के खिलाफ अब अन्नदाताओं ने मोर्चा खोल दिया है।तहसील राजातालाब क्षेत्र के ग्राम सभा करधना से बरकी तक के पीड़ित किसान सोमवार को संपूर्ण समाधान दिवस में पहुंचकर एक ज्ञापन सौंपा और अपनी आजीविका बचाने की गुहार लगाई।जमीन सिर्फ मिट्टी का टुकड़ा नहीं,हमारी आजीविका है।किसानों द्वारा संपूर्ण समाधान दिवस प्रभारी को सौंपे गए पत्र में कहा गया है कि पिछले कुछ समय से विकास योजनाओं के नाम पर क्षेत्र के किसानों की उपजाऊ कृषि भूमि का अधिग्रहण करने की प्रक्रिया चल रही है। इससे किसानों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।जमीन हमारे लिए सिर्फ मिट्टी का टुकड़ा नहीं है,बल्कि यह हमारी आजीविका का एकमात्र साधन है।अगर हमारी भूमि हमसे छीन ली गई,तो लाखों किसान परिवारों का भविष्य अंधकार में डूब जाएगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो जाएगी।अन्नदाता नहीं रहेगा,तो देश क्या खाएगा किसानों ने तीखे सवाल उठाते हुए कहा कि यदि देश का अन्नदाता ही अपनी भूमि से बेदखल कर दिया जाएगा।

तो अनाज कहाँ से पैदा होगा बिना किसान के देश का विकास और संचालन संभव नहीं है।भूमि अधिग्रहण का सीधा और घातक असर देश की आर्थिक स्थिति पर पड़ेगा न्यायोचित निर्णय की मांग।शिकायतकर्ता सुबेदार यादव,हुबलाल यादव,रमेश कुमार पटेल सहित अन्य पीड़ित ग्रामीणों ने संवेदनशील अधिकारियों से इस दर्द को समझने और न्यायोचित निर्णय लेने की अपील की है।किसानों की मांग है कि करधना से बरकी तक की कृषि भूमि के अधिग्रहण की प्रक्रिया को तत्काल रोका जाए ताकि किसानों के जीवन और उनकी आजीविका की रक्षा हो सके।इस मामले में तहसील प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर जल्द से जल्द उचित कार्रवाई करने की मांग की गई है।
