एस के श्रीवास्तव विकास

वाराणसी/-लंका थाना क्षेत्र के अंतर्गत पुलिस टीम पर जानलेवा हमला करने और गोवंश तस्करी के मामले में निरुद्ध एक किशोर अपचारी की जमानत अर्जी को स्वीकार कर लिया है। विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो अधिनियम) / अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश नितिन पाण्डेय (एच.जे.एस.) ने किशोर न्याय बोर्ड द्वारा पूर्व में पारित जमानत निरस्तीकरण के आदेश को रद्द करते हुए किशोर को उसकी माता के संरक्षण में रिहा करने का आदेश जारी किया है।अदालत में अभियुक्त की ओर से अधिवक्ता प्रमोद मौर्या, आशीष मौर्या और गुड़िया मौर्या ने प्रभावी ढंग से पक्ष रखा। मामले की पृष्ठभूमि और पुलिस मुठभेड़ अभियोजन कथानक के अनुसार, यह मामला 27 अक्टूबर 2025 की रात का है। थाना लंका के प्रभारी निरीक्षक राजकुमार अपनी टीम के साथ ‘ऑपरेशन चक्रव्यूह’ के तहत लौटूबीर अंडरपास पर चेकिंग कर रहे थे। इसी दौरान डाफ़ी टोल प्लाजा की तरफ से आ रही एक संदिग्ध पिकअप गाड़ी को जब रोकने का इशारा किया गया, तो चालक गाड़ी मोड़कर भागने लगा।सड़क पर मलबा होने के कारण गाड़ी रुकने पर अभियुक्तों ने पुलिस टीम पर जान से मारने की नीयत से फायर झोंक दिया। पुलिस द्वारा आत्मरक्षा में की गई जवाबी फायरिंग में मुख्य अभियुक्त विपिन कुमार शर्मा के पैर में गोली लगी, जबकि दूसरा अभियुक्त (बाल अपचारी) मौके पर ही रुक गया और दोनों को हिरासत में ले लिया गया। जांच करने पर उक्त पिकअप गाड़ी से अवैध रूप से वध हेतु बिहार ले जाए जा रहे 4 गोवंश बरामद हुए थे। पुलिस ने इस संबंध में मु.अ.सं. 458/2025 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS), उत्तर प्रदेश गोवध निवारण अधिनियम और आयुध अधिनियम की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया था।
