एस के श्रीवास्तव विकास

वाराणसी/-राजातालाब तहसील अन्तर्गत अदमापुर और अमीनी गांवों में इन दिनों भूमि अधिग्रहण की आशंका को लेकर किसानों के बीच भारी चिंता और बेचैनी का माहौल है।इसी विषय पर आपस में शांतिपूर्ण चर्चा करने और अपनी बात रखने के लिए रविवार को किसानों की एक आवश्यक बैठक बुलाई गई थी। लेकिन प्रशासन की ओर से अनुमति न मिलने के कारण यह बैठक नहीं हो सकी।एसडीएम से पुलिस तक अटका रहा प्रार्थना पत्र किसानों की इस बैठक को लेकर प्रसिद्ध समाज सेवी सुबेदार यादव ने जिलाधिकारी (डीएम) वाराणसी को विधिवत प्रार्थना पत्र देकर अनुमति मांगी थी।जिलाधिकारी ने इस मामले को उपजिलाधिकारी (एसडीएम) राजातालाब को मार्क कर दिया। लेकिन अंतिम समय में पुलिस अनुमति और कानून व्यवस्था का हवाला देते हुए प्रशासन ने किसानों को आपस में बैठक करने की इजाजत देने से साफ इनकार कर दिया और इस पर रोक लगा दी।किसानों में आक्रोश चर्चा के अधिकार से रोकने का आरोप बैठक रुकने के बाद क्षेत्र के किसानों और समाज सेवी सुबेदार यादव ने गहरी नाराजगी व्यक्त की है। किसानों का कहना है कि अपनी ही जमीनों के भविष्य को लेकर आपस में शांतिपूर्ण चर्चा करना उनका लोकतांत्रिक अधिकार है,लेकिन प्रशासन उनकी आवाज को दबाने का प्रयास कर रहा है।हम केवल अपनी आशंकाओं पर चर्चा करना चाहते थे।समाज सेवी सुबेदार यादव ने कहा अदमापुर और अमीनी के किसान अपनी कीमती कृषि भूमि के अधिग्रहण की खबरों से डरे हुए हैं।हमने पूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए जिलाधिकारी से बैठक की अनुमति मांगी थी,लेकिन पुलिस और प्रशासन का हवाला देकर हमारी आवाज को रोक दिया गया यह किसानों के साथ सरासर अन्याय है इस रोक के बाद से दोनों गांवों के किसानों में अंदर ही अंदर आक्रोश पनप रहा है।किसानों ने चेतावनी दी है कि वे अपनी पुश्तैनी जमीन को बचाने और अपनी बात शासन-प्रशासन तक पहुंचाने के लिए आगे की रणनीति तैयार करेंगे।
