एस के श्रीवास्तव विकास

वाराणसी/-उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यशैली और ‘त्वरित कार्यवाही’ के दावों पर वाराणसी के जंसा थाने में एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।जंसा थाना क्षेत्र के सत्तनपुर गांव की रहने वाली एक दलित महिला ने जंसा पुलिस पर बेहद संगीन और संवेदनहीन आरोप लगाए हैं।पीड़िता का कहना है कि दबंगों द्वारा उसके और उसकी 18 वर्षीय बेटी पर जानलेवा हमला किए जाने के बावजूद,जंसा पुलिस एफआईआर दर्ज करने के बजाय उन्हें टरका रही है।पीड़िता ने अब इस मामले में पुलिस कमिश्नर स्तर से दखल देने और क्राइम ब्रांच से जांच कराने की गुहार लगाई है।पीड़िता ने बताया कि उनके पति गुजरात में मजदूरी करते हैं और वह घर पर अपनी 18 वर्षीय बेटी और बेटे के साथ रहती हैं।आरोप है कि गांव के ही कुछ दबंग (गिरधारी पटेल,बिहारी पटेल,पप्पू पटेल,महेंद्र पटेल,रेखा और नीलम) आए दिन उन्हें जातिसूचक गालियां देते हैं और प्रताड़ित करते रहते हैं।गत 23 जून 2026 की सुबह करीब 11:30 बजे विपक्षीगणों ने जबरन पीड़िता के घर के सामने मड़ई रखकर रास्ता अवरुद्ध कर दिया।जब भानुप्रिया और उनके बच्चों ने इसका विरोध किया तो आरोपियों ने लाठी-डंडों से हमला कर दिया।प्रार्थना पत्र में पीड़िता ने अत्यंत दर्दनाक आपबीती सुनाई है।उन्होंने आरोप लगाया कि “विपक्षीगणों ने हमला कर मेरी साड़ी और अंतःवस्त्र तक खींच दिए और मुझे बुरी तरह अपमानित किया।दबंगों ने मारकर मेरा सिर फोड़ दिया।यही नहीं मेरी 18 साल की बेटी का दाहिना हाथ तोड़ दिया और उसके भी कपड़े फाड़ दिए।मेरे बेटे को भी बेरहमी से पीटा गया।पीड़िता का आरोप है कि घटना के वक्त उन्होंने 112 नंबर पर पुलिस को सूचना दी थी।मौके पर पहुंचे चौकी प्रभारी रामेश्वर और जंसा इंस्पेक्टर ने कोई सख्त कार्यवाही करने के बजाय पीड़िता से कहा कि “ऊपर से दबाव है,14 दिन तक घटना का मुआयना होता है और 14 दिन बाद ही मेडिकल व एफआईआर की कार्यवाही होगी।पीड़िता का कहना है कि जंसा थाने जाने पर उनके साथ दुर्व्यवहार किया जा रहा है और ऐसा प्रतीत होता है कि जंसा पुलिस भी इस घटना में आरोपियों के साथ शामिल है।वर्तमान में स्थिति यह है कि गंभीर रूप से घायल मां-बेटी का अब तक सरकारी दवा-इलाज और मेडिकल भी नहीं कराया गया है।दबंगों के डर से सहमा पीड़ित परिवार अब अपनी जान बचाने के लिए भटक रहा है।पीड़िता भानुप्रिया ने आलाधिकारियों को प्रार्थना पत्र भेजकर निम्नलिखित मांगें की हैं जिसमे तत्काल प्रभाव से मां और बेटी का उचित सरकारी मेडिकल और इलाज कराया जाए,जंसा थाने में आरोपियों के खिलाफ सुसंगत धाराओं में तत्काल एफआईआर दर्ज हो,जंसा पुलिस की संदिग्ध भूमिका को देखते हुए मामले की विवेचना डीसीपी स्तर या क्राइम ब्रांच से कराई जाए।पुलिस कमिश्नर स्तर से पीड़ित परिवार की जान-माल की सुरक्षा आज ही सुनिश्चित की जाए।आरोपो के बाबत जंसा इंस्पेक्टर अनिल कुमार शर्मा व चौकी प्रभारी रामेश्वर आदित्य सेन सिंह का कहना रहा कि महिला द्वारा लगाया जा रहा आरोप बेबुनियाद है महिला को एफआईआर व मेडिकल के लिए बुलाया गया था महिला जंसा थाना ना आकर कचहरी चली गयी व स्वयं से मेडिकल कराने की बात कह रही थी घटना के बाबत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।पुलिस आयुक्त वाराणसी मोहित अग्रवाल के हस्तक्षेप के बाद आनन फानन में जंसा पुलिस ने पीड़िता का मुकदमा दर्ज कर शुरू की जाँच पड़ताल।
