
भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़ी अनेक लीलाएं और कथाएं आज भी श्रद्धालुओं को आश्चर्यचकित करती हैं. इन्हीं में से एक है उनके सबसे बड़े पुत्र प्रद्युम्न की अद्भुत कथा. द्वारका के राजपरिवार में जन्मे, युवा राजकुमार जन्म के कुछ ही दिनों बाद गायब हो गए. पूरे राज्य ने उनकी खोज की, लेकिन उनका कोई सुराग नहीं मिला. अधिकांश लोगों का मानना था कि बच्चे की मृत्यु हो गई है. लेकिन द्वारका से बहुत दूर, एक शक्तिशाली राक्षस के महल की दीवारों के पीछे, एक रहस्य पनप रहा था. एक भविष्यवाणी, एक अपहरण और एक विशाल मछली के पेट में हुआ एक चमत्कार, यह सब एक दिव्य योजना का हिस्सा थे जो एक दिन लापता राजकुमार की असली पहचान उजागर करेगी.
भविष्यवाणी से भयभीत हो गया था शंबरासुर
श्रीमद्भागवत महापुराण और अन्य पुराणों के अनुसार, द्वारका में भगवान श्रीकृष्ण और माता रुक्मिणी का प्रद्युम्न नाम का एक पुत्र का जन्म हुआ था. प्रद्युम्न के जन्म से पहले एक भविष्यवाणी हुई थी कि श्रीकृष्ण और रुक्मिणी के पुत्र के हाथों ही शंबरासुर नामक शक्तिशाली दैत्य का अंत होगा. जब शंबरासुर को इस भविष्यवाणी का पता चला तो वह भयभीत हो गया. उसने सोचा कि अगर बालक को जन्म लेते ही समाप्त कर दिया जाए, तो भविष्यवाणी कभी पूरी नहीं होगी.
